2002 गोधरा ट्रैन मामला:17 वर्षों से जेल में बंद आजीवन कारावास के दोषी को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत
- Hindi
- December 15, 2022
- No Comment
- 1120
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 2002 के गोधरा ट्रैन कोच को जलाने के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक दोषी को ज़मानत दे दी।
चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पी एस नरसिम्हा की पीठ ने दोषी को ज़मानत देते हुए कहा कि वह पिछले 17 वर्षों से जेल में बंद है।
ग़ौरतलब है कि इस मामले में कई दोषियों की सजा के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
पीठ ने इन्ही दोषियों में से एक फारूक की ज़मानत की अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है।
इस मामले में 100 से ज़्यादा लोगों को गिरफ्तार कर ट्रायल कोर्ट में ट्रैन जलाए जाने का मामला चला था।
ट्रायल कोर्ट ने फरवरी 2011 को 31 लोगों को दोषी पाया था जबकि 63 को बरी कर दिया था। कोर्ट ने 11 लोगों को मृत्य दंड और 20 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
गुजरात हाईकोर्ट ने अक्तूबर 2017 में सभी दोषियों की दोषसिद्धि को बरक़रार रखते हुए मौत की सजा पाए 11 दोषियों की सजा को कम करके उसे आजीवन कारावास में बदल दिया था।
इस मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ दोषियों की अपील शीर्ष न्यायालय में लंबित है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गुजरात सरकार की ओर पेश होते हुए कहा कि यह एक जघन्य अपराध था जिसमे महिलाओं, बच्चों समेत 59 लोगों को ज़िंदा जला दिया गया था और दोषियों की अपील पर जल्द से जल्द सुनवाई की ज़रूरत है।
कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल के निवेदन को स्वीकार कर लिया जिसमे कहा गया था कि इस मामले में लंबित सभी अपीलों को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।